वर्क फॉर्म होम - ऑफ लाइन




आधी रात को वीणा जी आँख खुली, तो उन्हे लगा कि बेटे-बहु के कमरे में लाइट जल रही है और दरवाजा भी खुला है और तीन महीने के चीनू रो रही है।

दोनों कमरे आमने सामने है थे ,वो उठी तो देखा बहु अकेली थकी-थकी सी चीनू को गोदी में लेकर  घुमा रही है और वो रोये जा रही है।

"क्या हुआ बहु इसे !"

"पता नही माँ! शायद बहुत सर्दी है ,जिसके कारण सो नही पा रही।"

"अरे!तो अकेली परेशान हो रही हो मुझे उठा देती और ये संजू कहाँ गया!"

"जी वो उनको नीचे हॉल में भेज दिया है मैंने सोने के लिए।"

"क्यों!वो भी थोड़ी देर संभालता, घुमाता इसे कंधे पे।"

"अरे माँ उनकी नींद खराब होती और फिर ऑन लाइन वर्क फॉर्म होम भी तो करना रहता है।"

"तो क्या हुआ,अपने ही बच्चे के लिए नींद खराब होगी न ,और रोज़ तो नही होता।"

"लाओ, मुझे दो, मेरी नींद हो गई है। मैं घुमाती हूँ इसे,तुम सो जाओ आराम से।"

"पर माँ आप परेशान हो जाओगी।"

"नही बहु, ये सिर्फ तुम्हारी नहीं, पूरे परिवार की खुशियों भरी परेशानी है, जो सबके हिस्से में आनी चाहिए।"

"और हा संजू का तो दस घण्टे का वर्क फॉर्म होम है ऑनलाईन। पर ,छोटा बच्चा चौबीस घण्टे का वर्क फॉर्म होम है तुम्हारा, वो भी ऑफलाइन।

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